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शोले फिल्म का मशहूर डायलाग “रामगढ़ वाले कौन सी चक्की का आंटा खाते हैं रे” आप मे से बहुत से लोगो ने सुना होगा!
ये बात आज भी आपके सेहत और खूबसूरती के लिए जरूरी है ।मै ये सवाल आप से करता हूँ ,आप कौन सा आंटा अपने रोटी पकाने मे प्रयोग करते हैं?मुझे आज भी बचपन के वो दिन याद हैं जब हमारे घर मे गेहूं आता था और माताजी उसे फटक कर,चुन कर धोकर धूप मे सुखाती थीं।गेहूं सूख जाने पर हमलोग झोले मे भरकर आंटा चक्की वाले के पास ले जाते थे पिसवाने के लिए। वहाँ से पीसा हुआ आंटा गरम गरम झोले मे भरकर ले आया करते थे। उस आंटे से बनी रोटी कितनी नरम हुआ करती थी और पकाने मे फूलती थी ।आज हमलोग इतने व्यस्त हो गए हैं की हम किसी भी विज्ञापन को देखकर आसवस्त हो जाते हैं और ब्रांड देखकर आंटा का पाकेट खरीद लाते हैं ।

आप आज के दौर मे ये दावे के साथ नहीं कह सकते कि जो पाकेट पर लिखा है वो सचमुच पाकेट के भीतर है। आप जो पैक आंटा खरीदते हैं उसमे विशाल मात्रा मे गेहूं की पिसाई होती है और यह सुनिश्चित करना लगभग असंभव है की उस गेहूं मे कीटनाशक दावा की पोटली भी साथ ना पिस जाये। हम मे से ज़्यादातर लोग ये जानते हैं कि खतरनाक कीटनाशक CELPHOS कि पोटली बनाकर गेहूं के ढेड़ मे रखा जाता है ताकि उसमे घुन न लगे।
इस तरह ये घातक जहर आंटे से हमारे आहार मे प्रवेश कर हमारे शरीर मे पहुँच सकता है। हम बीमार हो सकते हैं।

इसके अलावा आंटा अच्छा दिखे इसके लिए गेहूं का बाहरी छिलका मशीन से छिल लिया जाता है। इस छिलके मे फाइबर होता है जो हमारे बॉडी के लिए बहुत जरूरी है। फाइबर हमारे पेट को साफ रखते हैं। कुछ लोग घर के पिसे आंटे को चाल कर प्रयोग करते हैं जो कि गलत है। ये चोकर मे बहुत फाइबर होता है जो हमारी आंतों को साफ रखने मे मदद करता है।हम सब बखूबी जानते हैं कि हमारी रोज़मर्रा कि अधिकतर बीमारियाँ कब्जियत के वजह से होती है। पेट साफ होने से शरीर तो स्वस्थ रेहता हे है साथ हे साथ चेहरे पर निखार भी आता है और खूबसूरती बी बढ़ती है। जो लोग कब्जियत से परेशान होते हैं उनके लिए ये चोकर एक मैडिसिन के समान हैं। लोग 300 रुपया खर्च कर कब्जीयत कि मैडिसिन खा लेंगे लेकिन आंटे का चोकर अलग कर गाय या मवेशी को खिला देंगे,।
तो दोस्तो मै येही कहना चाहता हूँ कि हमारी भारतीय संस्कृति मे जो हमलोग पारंपरिक तरीके से गेहूं से आंटा चक्की मे पिसवाते थे वो तरीका हमारे स्वास्थ्य कि दृष्टि से उत्तम है और साथ हे ये कम खर्चीला भी है। इसके अलावा ऐसे आंटे से बनी रोटी का स्वाद भी उत्तम होता है।